लाल किले की दर्द भरी दास्तां - 45 औरंगजेब ने अपनी बेगम के मकबरे के लिए धन नहीं दिया! | Extreme_Sports | Channify

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राजस्थान हिस्ट्री गूगल एप शुभदा प्रकाशन भारत एवं राजस्थान के दुर्लभ इतिहास को जानने के लिए फ्री ब्लॉग एवं ई-बुक्स हेतु डाउनलोड करें- https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rajasthanhistory.rajasthanbooks निवेदन- इस धारावाहिक का उद्देश्य भारत के इतिहास को उसकी सम्पूर्ण सच्चाई के साथ दर्शकों तक पहुंचाना है। हमारा उद्देश्य न तो किसी की प्रशंसा करना है और न किसी की बुराई करना। जो अतीत में हो चुका है, उसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है। हमने अपनी तरफ से पूरी तरह से निष्पक्ष रहने का प्रयास किया है। दर्शकों से अनुरोध है कि कृपया इस धारावाहिक को केवल इतिहास समझ कर देखें। इसमें जाति, धर्म, व्यक्तिगत आग्रह आदि बातों को नहीं ढूंढें। इस वीडियो के बारे में- औरंगजेब का मानना था कि वह संसार से कुफ्र मिटाकर इस्लाम का प्रसार करने आया है, उसके पास इन फालतू कामों के लिए न तो वक्त है और न पैसा। उसका काम कुफ्र की निशानियों को तोड़ना है न कि ताजमहल जैसी फालतू चीजें बनाना किंतु शहजादा आजमशाह नहीं माना। उसने जिद करके अपने पिता से छः लाख रुपए प्राप्त किए और औरंगाबाद में एक नया ताजमहल बनाने में जुट गया। शहजादी रौशनआरा ने भी इस कार्य में शहजादे आजमशाह की सहायता की जो औरंगजेब के बाद आजमशाह को बादशाह देखना चाहती थी। आगे का इतिहास जानने के लिए देखें यह वीडियो।

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